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सूर्य को जल चढ़ाते समय न करें ये गलतियां

Avoid these mistakes while offering water to the Sun.

सूर्य को जल चढ़ाते समय ना करें ये गलतियां!

भगवान सूर्य के उदय होते ही संपूर्ण जगत का अंधकार नष्ट हो जाता है और चारों ओर प्रकाश ही प्रकाश सूर्य को इस तरह जल चढ़ाने से बनते हैं फैल जाता है। सृष्टि के महत्वपूर्ण आधार सूर्य देवता हैं। वैदिक काल से सूर्योपासना अनवरत चली आ रही है। नियमित सूर्य को अघ्य देने से हमारी नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होती है । बल, तेज, पराक्रम, यश एवं उत्साह बढ़ता है। सूर्य की किरणों को आत्मसात करने से शरीर और मन स्फूर्तिवान होता है। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत सूर्य को जल / अर्घ्य देने की खास बातें……

सूर्य को इस तरह जल चढ़ाने से बनते हैं धनवान

जानें 14 काम की बातें…..

सूर्य देवता को अघ्य देने की आसान विधि:

1. सर्वप्रथम प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व शुद्ध होकर स्नान करें ।

2 . तत्पश्चात उदित होते सूर्य के समक्ष कुश का आसन लगाएं।

3 . आसन पर खड़े होकर तांबे के पात्र में पवित्र जल लें ।

4. उसी जल में मिश्री भी मिलाएं। कहा जाता है कि सूर्य को मीठा जल चढ़ाने से जन्मकुंडली के दूषित मंगल का उपचार होता है ।

5. मंगल शुभ हो तब उसकी शुभता में वृद्धि होती है ।

6. जैसे ही पूर्व दिशा में सूर्यागमन से पहले नारंगी किरणें प्रस्फुटितहोती दिखाई दें, आप दोनों हाथों से तांबे के पात्र को पकड़ कर इस तरह जल चढ़ाएं कि सूर्य जल चढ़ाती धार से दिखाई दें ।

7. प्रातः काल का सूर्य कोमल होता है उसे सीधे देखने से आंखों की ज्योति बढ़ती है।

8. सूर्य को जल धीमे-धीमे इस तरह चढ़ाएं कि जलधारा आसन पर आ गिरे ना कि जंमीन पर ।

9 . जमीन पर जलधारा गिरने से जल में समाहित सूर्य-ऊर्जा धरती में चली जाएगी और सूर्य अर्घ्य का संपूर्ण लाभ आप नहीं पा सकेंगे ।

10. अर्घ्य देते समय निम्न मंत्र का पाठ करें- ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पते । अनुकंपये माम भक्त्या गृहगाघ्यं दिवाकरः ।। (11 बार) 11. ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय, सहस्त्रकिरणाय । मनोवांछित फलं देहि देहि स्वाहारू ।। (3 बार)

12. तत्पश्चात सीधे हाथ की अंजूरी में जल लेकर अपने चारों ओर छिड़कें ।

13. अपने स्थान पर ही तीन बार घूम कर परिक्रमा करें।

14. आसन उठाकर उस स्थान को नमन करें ।

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