इतिहास

Complete History of firozabad

फिरोजाबाद इतिहास

फिरोजाबाद उत्तर प्रदेश का एक शहर एवं जिला मुख्यालय है। यह शहर चूड़ियों के निर्माण के लिये प्रसिद्ध है। यह आगरा से 40 किलोमीटर और राजधानी दिल्ली से 250 किलोमीटर की दूरी पर पूर्व की तरफ स्थित है । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ यहाँ से लगभग 250 किमी पूर्व की तरफ है । फिरोजाबाद जिले के अन्तर्गत दो कस्बे टूण्डला और शिकोहाबाद आते हैं। टूण्डला पश्चिम तथा शिकोहाबाद शहर के पूर्व में स्थित है। फिरोजाबाद में मुख्यतः चूडियों का कारोबार होता है । यहाँ पर आप रंग बिरंगी चूडियों को अपने चारों ओर देख सकते हैं । यहाँ पर काँच का अन्य सामान (जैसे काँच के झूमर) भी बनते हैं। इस शहर की आबो हवा गरम है। यहाँ की आबादी बहुत घनी है। यहाँ के ज्यादातर लोग कारोबार से जुडे हैं। घरों के अन्दर महिलाएं भी चूडियों पर पॉलिश और हिल लगाकर रोजगार अर्जित कर लेती हैं। बाल मजदूरी यहाँ आम है। सरकार तमाम प्रयासों के बावजूद उन पर अंकुश नहीं लगा सकी है। जबकि पंडित तोताराम सनाढय द्वारा बंधुआ मजदूरी / गिरमिटिया प्रथा को फिजी में समाप्त किया। जिनकी जन्म स्थली फीरोजाबाद से लगभग 8 किलो मीटर दूर गाओं हिरनगाओं में है । फिरोजाबाद को प्राचीन समय में चन्द्रनगर के नाम से जाना जाता था ।

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A View of Firozabad by William Hodges 1787

इतिहास
फिरोजाबाद का पुराना नाम चंदवार बताया जाता है, वर्तमान नाम अकबर के समय में मनसबदार फिरोजशाह द्वारा 1566 में दिया गया। चंदवार द्धया चंदावरॠ में राजा जयचंद और मुहम्मद गोरी के बीच 1194 ई. में युद्ध लड़ा गया जिसमें जयचंद की हार और मृत्यु हुई । फिरोजाबाद का प्राचीन नाम चंदवार नगर था । कहते हैं कि राजा टोडरमल गया से तीर्थ यात्रा कर के इस शहर के माध्यम से लौट रहे थे, तब उन्हें लुटेरो ने लूट लिया । उनके अनुरोध पर, अकबर महान ने मनसबदार फिरोजशाह को यहा भेजा। फिरोजशाह दतौजि, रसूलपुर, मोहम्मदपुर गजमलपुर, सुखमलपुर, निजामाबाद, प्रेमपुर रैपुरा के आस-पास उतरा। फिरोज शाह का मकबरा और कटरा पठानान में उसकी हवेली के खंडहर जो अब तकरीबन धूमिल हो चुके हैं इस बात का पुख्ता सबूत हैं.

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Firozashah
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Raja Jaychand

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फिरोजाबाद को बनाया परगना
ईस्ट इंडिया कंपनी से सम्बंदित एक व्यापारी पीर ने 9 अगस्त 1632 में यहाँ का दौरा किया और शहर को अच्छी हालत में पाया । यह आगरा और मथुरा की विवरणिका में लिखा है की फिरोजाबाद को एक परगना के रूप में उन्नत किया गया था। शाहजहां के शाशन में नबाब सादुल्ला को फिरोजाबाद जागीर के रूप में प्रदान किया गया। श्रीदहपत ने 1605 से 1627 तक शाशन किया। इलावा, बदायूं, मैनपुरी, फिरोजाबाद सम्राट फर्रुखसियर के प्रथम श्रेणी मनसबदार के अंतर्गत थे ।

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Bazirav Peshva

जाटों और मराठाओं का राज
बाजीराव पेशवा ने मोहम्मद शाह के शासन में 1737 में फिरोजाबाद और एतमादपुर लूटा। महावन के जाटों ने फौजदार हाकिम काजिम अली बहादुर जंग पर हमला किया और उसे 9 मई 1739 में मार दिया । जाटों ने फिरोजाबाद पर 30 साल शासन किया ।।
मिर्जा नबाब खान यहाँ 1782 तक रुके थे। 18 वीं सदी के अंत में फिरोजाबाद पर मराठाओं के सहयोग के साथ हिम्मत बहादुर गुसाई द्वारा शासन किया गया। फ्रेंच, आर्मी चीफ डी. वायन नवंबर 1794 में एक आयुध फैक्टरी की स्थापना की। श्री थॉमस ट्रविंग ने भी अपनी पुस्तक “Travels in India” में इस तथ्य का उल्लेख किया है। मराठाओं ने सूबेदार लकवाददस को यहां नियुक्त किया, जिसने पुरानी तहसील के पास एक किले का निर्माण कराया जो वर्तमान में गढैया के पास स्थित है।

फिरोजाबाद में ब्रिटिश राज
जनरल लेक और जनरल वेल्लजल्ल्य ने 1802 में फिरोजाबाद पर आक्रमण किया। ब्रिटिश शासन की शुरुआत में फिरोजाबाद इटावा जिले में था। लेकिन कुछ समय बाद यह अलीगढ़ जिले में संलग्न किया गया। जब 1832 में सादाबाद को नया जिला बनाया गया तो फिरोजाबाद को इस में सम्मिलित कर दिया गया । पर बाद में 1833 में फिरोजाबाद को आगरा में सम्मिलित कर दिया गया। 1847 में लाख का व्यापर यहाँ बहुत फल-फूल रहा था।
आजादी की लड़ाई में फिरोजाबाद की भूमिका

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Chandraprabhu Jain Mandir Firozabad

1857 के स्वतंत्रता संग्राम में चंदवार के जमींदारो ने स्थानीय मलहों के साथ सक्रिय भाग लिया। प्रसि) उर्दू कवि मुनीर शिकोहाबादी को ईस्ट इंडिया कंपनी सरकार ने श्री चन्द्रप्रभू जैन मंदिर काला पानी की सजा सुनाई थी। इस शहर के लोगो ने ‘खिलाफत आंदोलन’, ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ और ‘नमक सत्याग्रह’ में हिस्सा लिया और राष्ट्रीय आंदोलनों के दौरान जेल गए। 1929 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, 1935 में सीमांत गांधी, 1937 में पंडित जवाहर लाल नेहरू और 1940 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस फिरोजाबाद का दौरा किया।

संस्कृति

घेर खोखल का श्री सुपार्नाथ जैन मंदिर और खिड़की का चन्द्रप्रभु जैन मंदिर 250 से 300 साल तक पुराने हैं. फिरोजाबाद का पुराना नाम चंदवार पृथ्वीराज चौहान के समय में चन्द्रप्रभु की प्रतिमा से लिया गया था । मुहम्मद गौरी ने फिरोजाबाद से 6 किलोमीटर दूर एक जैन मंदिर पर 19 बार आक्रमण किया था। फिरोजाबाद की सबसे पुरानी, जामा मस्जिद को सोलहवीं सदी के मुगल बादशाह अकबर ने बनवाया था ।

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Nagar Nigam Firozabad

नगर पालिका की स्थापना
आगरा गजेटियर 1965 के पृष्ठ 263 के अनुसार फिरोजाबाद नगर पालिका की स्थापना सन् 1868 में प्रारम्भ हुई, अनेक वर्षो तक जुवान्त मजिस्ट्रेट इसका अध्यक्ष हुआ करता था । उस समय पुलिस की व्यवस्था भी नगर पालिका के अंतर्गत थी । सन् 2015 में फिरोजाबाद को नगर निगम घोषित कर दिया गया ।
काँच उद्योग का प्रारम्भ

फिरोजाबाद नगर निगम
कहते हैं पुराने समय मैं आक्रमणकारी अपने साथ कांच का सामान लाये । जब ये नकार दिए गए तब इन्हे इकट्ठा कर के “भैंसा भट्टी” नामक भट्टियों मैं गलाया गया था। कांच उद्योग खासकर आधुनिक कांच की चूड़ी की तकनीक को हाजी रुस्तम उस्ताद ने ईजाद किया था। उनकी दरगाह सोफीपुर मैं यमुना किनारे पर है। यह दरगाह मशहूर सूफी संत हजरत शाह सूफी की दरगाह के ठीक सामने है। यहाँ हर साल फिरोजाबाद कांच उद्योग के इस जनक की याद मैं एक विशाल मेला लगता है।

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अलीगढ इंस्टिट्यूट गजट सन् 1880 के पृष्ठ 1083 पर उर्दू के कवि मौलाना अल्ताफ हुसैन हाली ने लिखा है कि फिरोजाबाद में खजूर के पटटे की पंखिया एशी उम्दा बनती है कि हिंदुस्तान में शायद ही कही बनती हो । सादी पंखिया जिसमे किसी कदर रेशम का काम होता है एक रुपया कीमत की हमने भी यहाँ देखी । इस कथन से स्पस्ट होता है कि 1880 तक यहाँ काँच उद्योग का प्रारम्भ नहीं हुआ था, आगरा गजेटियर 1884 के पृष्ठ 740 के अनुसार उस समय फिरोजाबाद में लाख का व्यवसाय भी अच्छी स्थिति में था ये व्यवसाय कालान्तर में समाप्त हो गया है, परंतु वर्तमान में भारत में सबसे अधिक काँच की चूड़ियाँ, सजावट की काँच की वस्तुएँ, वैज्ञानिक उपकरण, बल्ब आदि फिरोजाबाद में बनाये जाते हैं । फिरोजाबाद मुख्यत चूड़ियों का व्यवसाय होता है। यहाँ पर आप रंगविरंगी चूड़ियों की दुकानें चारों ओर देख सकते हैं। इस शहर के अधिकांश लोग काँच के किसी न किसी सामान के निर्माण से जुड़े उद्यम में लगे हैं। सबसे अधिक काँच की चूड़ियों का निर्माण इसी शहर में होता है।

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Firozabad Railway Station

फिरोजाबाद में रेल का प्रारम्भ
सन 1862 में 1 अप्रेल को टूण्डला से शिकोहाबाद के लिए पहली रेलगाड़ी चालू हुई। इससे अगले वर्ष मार्च 1863 ई0 से टूण्डला से अलीगढ तक रेल चलने लगी। यह जिला रेल और बस से प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। सबसे नजदीकी हवाई अड्डा आगरा है । देशांतर 78 डिग्री पूर्व और अक्षांश 27 डिग्री उत्तर है। समुद्र तल से ऊंचाई 164.467 मीटर है। जिले की सीमाएं उत्तर में एटा जिले और पूर्व में मैनपुरी और इटावा से लगती हैं। यमुना नदी इसकी दक्षिणी सीमा बनाती है। जिले का क्षेत्रफल उत्तर प्रदेश के कुल क्षेत्रफल का लगभग 0.8 : और जनसंख्या उत्तर प्रदेश की कुल जनसंख्या का 1.1: है । लगभग 73.6: आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है। यहां कड़ाके की सर्दी और गर्मी पड़ती है। ज्यादातर जिला मैदानी है और इसका ढलान उत्तर पश्चिम से दक्षिण की ओर है।

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